गाजीपुर के ऐतिहासिक सोनहरिया वन में 'जंगल में मंगल': गंगा पुत्र त्रिदंडी स्वामी महाराज के सानिध्य में 4 महीने चलेगा महायज्ञ
उत्तरप्रदेश,गाजीपुर
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक सोनहरिया वन में इन दिनों आध्यात्मिक उत्सव का माहौल है। बक्सर धाम के पूज्य संत 1008 त्रिदंडी स्वामी महाराज (गंगा पुत्र) के पावन सानिध्य में इस घने अरण्य को भक्तिमय केंद्र के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। बाबा सिद्धनाथ धाम प्रांगण में चार महीने तक चलने वाले विराट महायज्ञ का संकल्प लिया गया है, जिसकी तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं।
लगभग 32 बीघे के क्षेत्रफल में फैला सोनहरिया वन केवल गाजीपुर ही नहीं, बल्कि समूचे भारतवर्ष में अपनी आस्था और कठोर मान्यताओं के लिए विख्यात है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस वन से सूखी लकड़ी तक घर ले जाने की मनाही है और रात्रि के समय जंगल में ठहरने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। गंगा-जमुनी तहज़ीब का अनुपम उदाहरण पेश करने वाले इस पावन वन क्षेत्र में दो महान विभूतियों के समाधि स्थल हैं—एक ओर मलक बाबू शाह की मजार, तो दूसरी ओर बाबा सिद्धनाथ धाम। यहां आने वाले भक्त दोनों स्थलों पर शीश नवाकर ही अपनी यात्रा पूर्ण मानते हैं।
28 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा
महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ 28 अक्टूबर को ऐतिहासिक जल भरी कलश यात्रा के साथ होगा। आयोजन समिति के अनुसार, इस शोभायात्रा में देश भर से शीर्ष संत-महात्मा, विद्वान और लाखों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होंगे। दर्जनों गांवों के ग्रामीण और स्थानीय नागरिक आयोजन को सफल बनाने के लिए तन-मन से जुटे हुए हैं।
'संत के लिए जंगल ही महल है': त्रिदंडी स्वामी महाराज
मीडिया से बातचीत करते हुए गंगा पुत्र त्रिदंडी स्वामी महाराज ने कहा कि संत के लिए प्रकृति की गोद और जंगल ही महल के समान होता है। उन्होंने कहा, "बाबा सिद्धनाथ धाम प्रांगण और इस तपोभूमि की दिव्यता ने मन को मोह लिया। प्रभु की कृपा से इस वन को मंगलमय बनाने का संकल्प लिया है। यज्ञ को पूर्ण और सफल बनाना ईश्वर के हाथ में है, हम तो केवल उनके सेवक हैं।"स्वामी जी ने आगे कहा कि सनातन परंपरा को जीवंत बनाए रखना और कथा-सत्संग का श्रवण करना मानव जीवन में असीम सुख और शांति लाता है। उन्होंने समस्त धर्मप्रेमियों से इस चार माह के महायज्ञ और कथा सत्र में सपरिवार सम्मिलित होकर पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया।
ब्यूरो चीफ रामप्रवेश राय

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