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उत्तरप्रदेश, कानपुर नगर
वर्ष 2007में आई फिल्म ट्रैफिक सिग्नल जिसमें मुंबई के कई ट्रैफिक सिग्नलों में भिखारियों से जबरन भीख मंगवाई जाती थी और छोटे छोटे बच्चों से लेकर उम्रदराज लोगों से ट्रैफिक सिग्नल में भीख मांगने का सीन दिखाया गया इस फिल्म में इन भिखारियों को एक व्यक्ति को डेली कमीशन देना होता था ये कमीशन मुंबई के आला दर्जे के लोगों तक पहुंचाने का काम फिल्म का वही वसूली बाज करता था जो भिखारियों के लिए एरिया फिक्स करता था।
आज कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन का भी एक सच सामने आ रहा है गोलू नाम का शख्स भी ट्रेनों में भीख मांगने वाले भिखारियों से वसूली करता ये हम बिल्कुल नहीं कहते ये बात x पर वायरल एक वीडियो में एक किन्नर कह रहा रही है।
देश के कुल पांच सेंट्रल रेलवे स्टेशनों में एक कानपुर सेंट्रल स्टेशन एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने रेलवे सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। वीडियो में ट्रेनों में सक्रिय रहने वाले किन्नर और भिखारी खुलेआम एक 'सिंडिकेट' के अस्तित्व और उसे संचालित करने वाले 'गोलू' नाम के एक कथित सरगना का खुलासा कर रहे हैं।वीडियो में एक किन्नर को साफ तौर पर यह कहते सुना जा सकता है कि कानपुर सेंट्रल और आसपास की ट्रेनों में भीख मांगने या वसूली करने के लिए बाकायदा 'मंथली' (मासिक शुल्क) देना पड़ता है। इस अवैध वसूली का जिम्मा 'गोलू' नाम के एक शातिर व्यक्ति के पास है, जो हर भिखारी और किन्नर से तय रकम वसूलता है। आरोप है कि जो व्यक्ति यह 'टैक्स' नहीं देता, उसे स्टेशन परिसर या ट्रेनों में प्रवेश करने से रोक दिया जाता है।
आखिर किसकी शह पर फल-फूल रहा है यह तंत्र?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों का कहना है कि यह वसूली बिना खाकी की सरपरस्ती के मुमकिन नहीं है। क्या रेल प्रशासन के कुछ कर्मचारी भी इस 'मंथली' के खेल में हिस्सेदार हैं?
यात्रियों की सुरक्षा पर गहराता संकट
स्टेशनों पर इस तरह के संगठित समूहों का कब्जा यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। आए दिन ट्रेनों में जबरन वसूली और यात्रियों से बदतमीजी की खबरें आती रहती हैं। यदि इस 'सिंडिकेट' पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह कानपुर सेंट्रल की छवि को और धूमिल करेगा।
"वीडियो में जिस 'गोलू' का नाम सामने आया है, उसकी पहचान और उसकी कार्यप्रणाली की जांच गहनता से होनी चाहिए। रेलवे के उच्चाधिकारियों को इस दिशा में कड़ा संज्ञान लेना होगा।"
सुरेश राठौर

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