"घंटाघर से हटा 'सिंडिकेट' का कब्जा, पुलिस के हनक के आगे रसूखदार पस्त"
उत्तरप्रदेश,कानपुर नगर
क्षेत्र की समस्याओं और घंटाघर चौराहे पर सिंडिकेट के 'जंगलराज' को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। खबर का बड़ा असर देखने को मिला है—क्षेत्रीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कानपुर सेंट्रल स्टेशन के मुख्य द्वार और घंटाघर चौराहे को अतिक्रमण मुक्त करा दिया है। जिन रास्तों पर कल तक ठेलों और अवैध कब्जे का पहरा था, वहां अब यातायात सुगम नजर आ रहा है।
समाचार पत्र द्वारा प्रमुखता से खबर दिखाए जाने के बाद पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से डटे ठेले वालों और वसूली करने वाले सिंडिकेट के गुर्गों को खदेड़ दिया। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से उन रसूखदारों में भी हड़कंप मच गया है, जो स्टेशन के मुहाने पर अवैध वसूली का नेटवर्क चला रहे थे। राहगीरों का कहना है कि जो रास्ता पार करने में 20 से 30 मिनट लगते थे, अब वहां से चंद मिनटों में गुजरना मुमकिन हो पा रहा है।
सेंट्रल स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों ने इस कार्रवाई पर खुशी जताई है। स्टेशन के गेट के पास सुगम यातायात देखकर एक यात्री ने बताया, "कल तक यहाँ पैर रखने की जगह नहीं थी, लेकिन आज पुलिस की मुस्तैदी से जाम गायब है। ऐसी कार्रवाई रोजाना होनी चाहिए।" भारी सामान लेकर चलने वाले मुसाफिरों के लिए अब स्टेशन तक पहुंचना पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आसान हो गया है।
चुनौती: क्या बरकरार रहेगी यह व्यवस्था?
हालांकि अतिक्रमण हट गया है, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में अब भी एक बड़ा सवाल है—क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी? पूर्व में भी नगर निगम और पुलिस के अभियान के कुछ घंटों बाद सिंडिकेट फिर से सक्रिय हो जाता था।
जनता अब मांग कर रही है कि इस क्षेत्र में 'नो वेंडिंग ज़ोन' का सख्ती से पालन हो और पुलिस की गश्त चौबीसों घंटे बनी रहे ताकि दोबारा कोई 'जाल' न बुन सके।
सुरेश राठौर





0 Comments