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ऐतिहासिक ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन की फिर थमेगी कमान, रेल मंत्रालय ने दी हरी झंडी

गाजीपुर के ग्रामीणों और व्यापारियों की जीत; जनप्रतिनिधियों व पत्रकार के प्रयास लाए रंग

BBC CRIME TV

उत्तरप्रदेश,​गाजीपुर

अंग्रेजों के जमाने से गाजीपुर की लाइफलाइन कही जाने वाली ताड़ीघाट-दिलदारनगर पैसेंजर ट्रेन एक बार फिर पटरी पर दौड़ती नजर आएगी। रेल मंत्रालय ने स्थानीय मांग और जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इस ट्रेन को पुनः संचालित करने का निर्णय लिया है। इस खबर के सामने आते ही जनपदवासियों, विशेषकर ताड़ीघाट और दिलदारनगर क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

विरासत से जुड़ी है यह रेल सेवा

​गौरतलब है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से दिलदारनगर होते हुए ताड़ीघाट तक जाने वाली यह ट्रेन बेहद ऐतिहासिक है। ब्रिटिश शासनकाल में इसे मुख्य रूप से जनपद स्थित एशिया की सबसे बड़ी अफीम फैक्ट्री के संचालन और रसद आपूर्ति के लिए शुरू किया गया था। इस ट्रेन के बंद होने से मुख्यालय आने-जाने वाले छात्रों, व्यापारियों और आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। वहीं, स्टेशन के आस-पास जीविकोपार्जन करने वाले सैकड़ों गरीब दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडरा रहा था।


​जनता की आवाज ने दिखाया असर

​ताड़ीघाट निवासी प्रधान प्रतिनिधि सुखवीर सिंह झाबर ने इस मुद्दे को रेल मंत्रालय और भारत सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने चैनल और विभिन्न माध्यमों से सरकार को अवगत कराया कि इस ट्रेन का चलना ग्रामीणों, कॉलेज छात्रों और मुख्यालय जाने वाले लोगों के लिए अनिवार्य है।


इसी क्रम में वरिष्ठ पत्रकार राम प्रवेश राय ने बताया कि दानापुर मंडल के अधिकारियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जनता की मांग पहुंचाई गई थी। रेलवे प्रशासन ने जांच के बाद सकारात्मक रुख अपनाते हुए संचालन के लिए चार महीने का समय माँगा है।


क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल

​ट्रेन के दोबारा चलने के निर्णय पर सुखवीर सिंह झाबर ने भारत सरकार और रेल मंत्रालय का आभार व्यक्त किया है। स्थानीय जनता का मानना है कि इस ट्रेन के शुरू होने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी एक बार फिर सुधार आएगा।

​ ब्यूरो चीफ राम प्रवेश राय

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