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रेलवे परिसरों में रील और स्टंट बनाने वालों पर कसेगा शिकंजा: बिना अनुमति व्लॉगिंग व भ्रामक सामग्री फैलाने पर होगी कड़ी कानूनी कार्यवाही

भ्रामक रेल वीडियो और अनधिकृत व्लॉगिंग पर BNS व रेल एक्ट के तहत दर्ज होगा मुकदमा

​BBC CRIME TV 

उत्तरप्रदेश, कानपुर /प्रयागराज

सोशल मीडिया पर अधिक व्यूज और लाइक्स हासिल करने की होड़ में रेलवे ट्रैक और ट्रेनों में जानलेवा स्टंट करने तथा रेल परिचालन को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले  खिलाफ उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के प्रयागराज मंडल ने सख्त रुख अपनाया है। मंडल प्रशासन ने इस संबंध में स्पष्ट परामर्श (एडवाइजरी) जारी करते हुए चेतावनी दी है कि रेल सुरक्षा से खिलवाड़ करने और रेलवे की छवि खराब करने वालों के विरुद्ध रेल अधिनियम समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​रेलवे प्रशासन के संज्ञान में आया है कि यूट्यूब समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रेल संचालन को लेकर अधूरी, त्रुटिपूर्ण और भ्रामक सामग्री प्रसारित की जा रही है। कई हाई-सब्सक्राइबर वाले चैनल और कंटेंट क्रिएटर्स सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर न केवल गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि रेल यात्रियों में अनावश्यक भय और भ्रम भी पैदा कर रहे हैं।

​बिना अनुमति शूटिंग दंडनीय अपराध

प्रयागराज मंडल ने स्पष्ट किया है कि सक्षम रेल प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना रेलवे परिसर, स्टेशनों, ट्रैकों, यार्ड, कार्यशालाओं अथवा ट्रेन के कोच में व्लॉगिंग, वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना रेल अधिनियम, 1989 के तहत संज्ञेय एवं दंडनीय अपराध है। पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश (ट्रेसपासिंग), प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठ और खतरनाक स्टंट करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

​मानहानि और भ्रामक प्रचार पर बीएनएस के तहत होगी कार्रवाई

रेलवे की साख को नुकसान पहुंचाने और तथ्यहीन सामग्री प्रसारित करने वालों पर रेल अधिनियम के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356(1) एवं 356(2) (मानहानि संबंधी प्रावधान) के तहत भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

​प्रशासन ने आम जनता और कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की है कि वे नागरिक दायित्वों का पालन करें और जिम्मेदार रेल यात्रा संस्कृति को बढ़ावा दें। साथ ही यात्रियों से आग्रह किया गया है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले गैर-प्रमाणित दावों के बजाय केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

सुरेश राठौर 


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