फेथफुल गंज के मासूम ने कमसिन उम्र में दिखाया धैर्य और जज्बा, इफ्तार पर लगा मुबारकबाद देने वालों का तांता
BBC CRIME TVउत्तरप्रदेश,कानपुर नगर
रमजान-उल-मुबारक के मुकद्दस महीने में इबादतों का दौर जारी है। इसी बीच 14वें रोजे पर कानपुर का फेथफुल गंज इलाका एक मासूम की भक्ति और जज्बे का गवाह बना। क्षेत्र के निवासी जसीम अहमद के 8 वर्षीय पुत्र उनैश अहमद अब्बासी ने अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखकर न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे मोहल्ले का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया।
बचपन की जिद और खुदा का करम
उनैश के परिजनों ने बताया कि इतनी कम उम्र होने के बावजूद उनैश ने रोजा रखने की जिद की थी। सुबह सहरी के वक्त से ही उनके चेहरे पर एक अलग उत्साह था। चिलचिलाती धूप और प्यास के बीच मासूम उनैश ने पूरे धैर्य और इस्तिकामत (दृढ़ता) के साथ अपना पहला रोजा मुकम्मल किया। शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर रूहानी चमक साफ देखी जा सकती थी।
जैसे ही मगरिब की अजान हुई और उनैश ने अपना पहला रोजा खोला, घर का माहौल ईमानी जज्बात से सराबोर हो गया। इस मौके पर अजीज-ओ-अकारिब, दोस्तों और मोहल्ले के लोगों का तांता लग गया। बुजुर्गों ने उनैश के सिर पर हाथ रखकर दुआएं दीं, वहीं हमउम्र बच्चों ने गले लगाकर उसकी हौसला अफजाई की।मोहल्ले के गणमान्य व्यक्तियों ने इसे उनैश के उज्जवल और नेक भविष्य की निशानी करार दिया। उनके वालिद जसीम अहमद ने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए कहा कि बच्चों में बचपन से ही इबादत का शौक होना खुदा की खास रहमत है। यह यादगार लम्हा पूरे खानदान के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है।
जैसे ही मगरिब की अजान हुई और उनैश ने अपना पहला रोजा खोला, घर का माहौल ईमानी जज्बात से सराबोर हो गया। इस मौके पर अजीज-ओ-अकारिब, दोस्तों और मोहल्ले के लोगों का तांता लग गया। बुजुर्गों ने उनैश के सिर पर हाथ रखकर दुआएं दीं, वहीं हमउम्र बच्चों ने गले लगाकर उसकी हौसला अफजाई की।मोहल्ले के गणमान्य व्यक्तियों ने इसे उनैश के उज्जवल और नेक भविष्य की निशानी करार दिया। उनके वालिद जसीम अहमद ने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए कहा कि बच्चों में बचपन से ही इबादत का शौक होना खुदा की खास रहमत है। यह यादगार लम्हा पूरे खानदान के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है।
राजीव कुमार पाण्डेय



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