गंगा में गिर रहे नालों के बायोरेमेडिएशन पर नगर आयुक्त सख्त, मौके से रजिस्टर गायब मिलने पर जताई नाराजगी
BBC CRIME TV
उत्तरप्रदेश,कानपुर नगर
शहर के नालों का दूषित पानी गंगा में प्रवाहित होने की खबरों का संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने सोमवार को रानीघाट स्थित बायोरेमेडिएशन स्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यप्रणाली में कई खामियां पाई गईं, जिस पर नगर आयुक्त ने सख्त तेवर अपनाते हुए अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाई।
निरीक्षण के दौरान अर्बन इन्फ्रा विशेषज्ञ राहुल अवस्थी ने बताया कि शहर के कुल 13 नालों को बायोरेमेडिएशन तकनीक से साफ किया जा रहा है। इनमें रानीघाट, गोला घाट, रामेश्वर घाट और सत्तीचौरा समेत 7 नाले गंगा नदी में गिरते हैं, जबकि पनकी थर्मल और अर्रा बिनगवां सहित 6 अन्य नाले पांडु नदी में गिरते हैं। इस कार्य की जिम्मेदारी डॉ. हेमंत गुप्ता की फर्म मेसर्स ऑर्गेनिक 121 साइंटिफिक प्रा. लि. को सौंपी गई है।
जोनल अभियंता मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया कि बायोरेमेडिएशन प्रक्रिया के माध्यम से पानी के हानिकारक प्रदूषकों (BOD और COD) को कम किया जाता है। ट्रायल पीरियड के अंत तक इसे 40% और उसके बाद 70% तक कम करने का लक्ष्य है। नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि पानी के नमूनों की नियमित जांच CSIR से कराई जाए।
नगर आयुक्त ने जब मौके पर रजिस्टर और अन्य दस्तावेज मांगे, तो वे नदारद मिले। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थल पर दैनिक जल निकासी माप पुस्तिका रखी जाए, जिस पर जोनल अभियंता प्रतिदिन हस्ताक्षर करेंगे।
पानी में डाले जाने वाले बैक्टीरिया और एंजाइम का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए और दवा डालते समय की जियोटैग फोटो अनिवार्य रूप से भेजी जाए।टेस्टिंग विश्लेषण पुस्तिका का रख-रखाव भी सख्ती से किया जाए।
निरीक्षण के दौरान रानीघाट के पास कूड़े के बड़े ढेर पाए गए। इस पर नगर आयुक्त ने क्षेत्रीय सफाई नायक रज्जव अली को कड़ी चेतावनी देते हुए आज ही कूड़ा साफ कर जियोटैग फोटो भेजने का निर्देश दिया।
सुरेश राठौर



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