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डिजिटल अरेस्ट कर 15 करोड़ ठगने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश, 6 गिरफ्तार

450 फर्जी बैंक खातों और P2P ट्रेडिंग के जरिए रकम को बदलते थे क्रिप्टोकरेंसी में,देशभर में 2500 से अधिक लोगों को बना चुके हैं शिकार

​BBC CRIME TV 

उत्तरप्रदेश,कानपुर नगर 

थाना शिवराजपुर पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के छह शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को सीबीआई और पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। अपराधियों की धरपकड़ करने वाली पुलिस टीम को कमिश्नरेट द्वारा 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार और कमल के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि ये शातिर अपराधी आम लोगों को फोन कर खुद को पुलिस, सीबीआई, कस्टम या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। इसके बाद पीड़ित को फर्जी मुकदमों या संदिग्ध पार्सल के नाम पर गिरफ्तारी का भय दिखाकर घंटों वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' रखते थे। बदनामी और जेल जाने के डर से पीड़ित मोटी रकम ट्रांसफर कर देते थे।


जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गिरोह ठगी की रकम को तुरंत ठिकाने लगाने के लिए 450 से अधिक फर्जी और किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। इसके बाद इस धनराशि को पी2पी (P2P) ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (USDT) जैसी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर दिया जाता था, जिससे पुलिस उन तक न पहुंच सके।​एनसीआरपी (NCRP) और प्रतिबिंब पोर्टल से मिले आंकड़ों के मुताबिक, यह गिरोह पिछले 3 वर्षों से सक्रिय था और अब तक देशभर के लगभग 2,500 लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। इस गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी कई मामले और शिकायतें दर्ज हैं।


पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 05 मोबाइल फोन, 01 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 02 चेकबुक और 12 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। गिरोह के अन्य कड़ियों को खंगालने के लिए आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

सुरेश राठौर 

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